यूं कीजिए चुटकियों में दूर माहवारी की हर परेशानी

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यूं कीजिए चुटकियों में दूर माहवारी की हर परेशानी

माहवारी यानी पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों का सामना लगभग हर महिला को अक्सर करना ही पड़ता है।

यूं कीजिए चुटकियों में दूर माहवारी की हर परेशानी

माहवारी को न समझें बीमारी, यूं करें चुटकियों में दूर हर परेशानी

मासिक चक्र, माहवारी, पीरियड्स या मेस्ट्रूएशन, शायद ही कोई ऐसा होगा, जो इस शब्द से परिचित न हो, अब चाहे वह महिला हो या पुरुष, लेकिन हर शब्द के साथ कितना समस्याएं, दर्द या अनइज़ीनेस महसूस होता है, वह सिर्फ़ एक महिला ही समझ सकती है। अब यहां भी एक प्वॉइंट ये है कि कुछ महिलाएं इतनी लकी हैं कि उनकी पीरियड्स टाइमिंग भी नॉर्मल होती हैं, उन्हें ज़्यादा प्रॉब्लम नहीं होती है, लेकिन कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं, जिनके लिए पीरियड्स के ये पांच या छह दिन बेहद तकलीफ़ से भरे होते हैं। सो आज हम यहां कुछ   ऐसी बातें आपके साथ साझा कर रहे हैं, जिनकी हेल्प से आपकी पीरियड्स की परेशानियां कुछ कम होंगी। हां, एक बात हम शुरू में ही बता दें कि ये टिप्स तीन बातों पर बेस्ड हैं- कुछ सीनियर गाइनोकॉलजिस्ट्स से बातचीत पर घरेलू, कुछ ऐसे सदाबहार घरेलू नुस्खे, जिनका असर आज तक कम नहीं हुआ है और कुछ ऐसे औषधीय वैद्यकीय उपाय, जो आपको सुनने में अटपटे से भी लग सकते हैं, लेकिन अगर इनका असर देखना है तो आज़माकर देख लीजिए। कहते भी हैं न कि दिखावे पर मत जाओ, अपनी अकल लगाओ। तो चलिए बात करते हैं सबसे पहले पीरियड्स के दौरान पर्सनल हाइजिन पर-

कपड़े हों आरामदायक


पीरियड्स के दौरान ऐसी कॉटन पैंटी ही कैरी करें, जो न तो इतनी टाइट हो कि आपकी थाइस पर रेशेस पड़ जाएं और न ही इतनी लूज़ हों कि आपको पेड को सहूलियत के साथ कैरी करने में किसी भी तरह की दिक्कत महसूस हो। हालांकि ऐसा कोई टैबू नहीं है कि इस दौरान आपको कैसे रंग के कपड़े पहनने चाहिए, लेकिन अगर आप उन महिलाओं में से हैं, जो इस दौरान काफ़ी कॉन्शेस महसूस करती हैं तो आप अपने पीरियड्स डेज़ में डार्क कलर के कपड़े करें। हां मगर जो भी पहनें, वह आरामदायक और साफ़-सुथरा होना ज़रूरी है। ये हर्गिज़ मत सोचिएगा कि पीरियड्स के दौरान कुछ भी, कैसा भी पहना जा सकता है।
 

हाइजिन का रखें ध्यान


पीरियड्स के दौरान पर्सनल और अपने आस-पास के हाइजिन का पूरा-पूरा ख़याल रखें, क्योंकि इस समय बॉडी काफ़ी सेंसेटिव होती है। यहां ये ग़ौर करने वाली बात है कि ज़्यादातर महिलाएं इस प्वॉइंट को काफ़ी हल्के में लेती हैं। अपने कपड़े, बिस्तर, टॉवल वग़ैरह का भी पूरा-पूरा ध्यान रखें। 

बार-बार न नहाएं


अब यहां हम आपको हाइजिन से जुड़ा वह प्वॉइंट बता रहे हैं, जो पुराने देसी तरीकों और आयुर्वेदिक उपायों पर आधारित है। सुनने में अजीब ज़रूर है, लेकिन असर आपको हैरानी में डाल देगा। अगर पीरियड्स के दौरान आपको बॉडी में बहुत दर्द या डलनेस महसूस होती है या फिर आप पहले से ही हड्डियों से जुड़ी किसी समस्या, जैसेकि ऑर्थोराइटिस या ऑस्टियोपोरोसिस जैसी प्रॉब्लम का सामना कर रही हैं तो आप अपने पीरियड्स के पहले दो दिन हर्गिज़ न नहाएं। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक सुना है, पीरियड्स के पहले दो दिन हर्गिज़ न नहाएं। बस पूरी बॉडी को अच्छे से स्पंज कर लें और पानी मौसम के हिसाब से गर्म या गुनगुना रखें। गर्मी है, ये सोचकर ठंडे पानी की शरण में न जाएं। ठंडा पानी पीरियड्स के दौरान हड्डियों का सामना कर रही महिलाओं के लिए सही नहीं है। इससे इस दौरान आपको ज्वॉइंट्स में ज़्यादा दर्द महसूस हो सकता है। आपको शायद ये अजीब लग सकता है कि यहां हम एक तरफ़ तो आपको हाइजिन मेंटेन करने की बात कह रहे हैं और दूसरी तरफ़ कह रहे हैं कि नहाने की बजाय बॉडी को सिर्फ़ स्पंज करें, लेकिन यकीन कीजिए, हड्डियों से जुड़ी किसी भी समस्या को पीरियड्स के दौरान बढ़ने से रोकने के लिए ये एक बरसों पुराना आज़माया हुआ देसी नुस्ख़ा है। आपने ये तो शायद सुना ही हो कि पहले के समय में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अलग-थलग कर दिया जाता था। उन्हें कई चीज़ें छूने की मनाही होती थी, पूजा-पाठ वर्जित होता था। दरअसल सच ये है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को कम्पलीट रेस्ट, अच्छे खान-पान, मानसिक शांति और थोड़ी सी ख़ास देखभाल की ज़रूरत होती है। ये नियम बेसिकली इसी पर आधारित थे, जिनमें बाद में कम जानकारी, अंधविश्वास और अज्ञानता के चलते कई मिथ जुड़ते चले गए, लेकिन मूल धारणा पीरियड्स के दौरान महिलाओं के लिए ज़रूरी इन्हीं बातों का ध्यान रखना था। 
 

पेड जल्दी-जल्दी बदलें


आप चाहे साफ़-सूती कपड़ा इस्तेमाल करना पसंद करती हों या फिर सेनेटरी पेड, वह ज़रूरत के हिसाब से जल्दी-जल्दी बदलें। सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन बहुत सी महिलाएं पेड काफ़ी देर तक कैरी करके रखती हैं। कई बार ऐसा होने के पीछे ये मजबूरी होती है कि पेड बदलने के लिए कोई सही जगह या टॉयलेट नहीं मिल पाया, लेकिन कई बार कुछ महिलाओं की ये सोच भी होती है कि पेड बहुत महंगे होते हैं, सो एक ही पेड जितनी ज़्यादा देर तक चलाया जा सके, यूज़ करना चाहिए। माफ़ कीजिए, मगर पेड चाहे कितने भी महंगे क्यों न हो, उनकी क़ीमत आपको हो सकने वाले इंफेक्शन से नहीं चुकाई जा सकती। सो इस बात का इंतज़ार मत कीजिए कि पेड बदलना आपकी मजबूरी बन जाए, बल्कि पेड जल्दी-जल्दी ही बदलें।
 

देसी घी का करें ख़ूब इस्तेमाल


जी हां, ये आज का नहीं, बल्कि सालोसाल पुराना और ख़ूब आज़माया हुआ नुस्ख़ा है। अगर पीरियड्स के दौरान आपको बहुत ज़्यादा दर्द महसूसहोता है तो आप अपने खान-पान में देसी घी का सेवन बढ़ा दीजिए। चाहे दाल-सब्ज़ी हो या फिर रोटी पर लगाकर, आप जिस भी रूप में देसी घी का सेवन कर सकती हैं, ज़रूर कीजिए। ये न सिर्फ़ पीरियड्स के दौरान होने वाले आपके पेट दर्द को बहुत हद तक कम करेगा, बल्कि इस दौरान होने वाली सुस्ती-कमज़ोरी या चक्कर आने जैसी समस्याओं पर भी आप इसका सीधा असर महसूस कर सकती हैं। देसी घी का सेवन एक ऐसा उपाय है, जो न केवल पीरियड्स के दौरान, बल्कि आमतौर पर भी आपकी इन शारीरिक समस्याओं में इसका प्रभाव देखने को मिलता है। हां, अगर आपकी डॉक्टर ने किसी ख़ास कारण के चलते आपको देसी घी का सेवन करने की मनाही की है तो बात अलग है, वर्ना घी के गुण हैं घने। 

व्यायाम नहीं, आराम का रखिए ध्यान

आमतौर पर यही कहा जाता है कि व्यायाम हमेशा करना फ़ायदेमंद होता है। बिल्कुल होता है, लेकिन पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर से इतना ख़ून जाता है, जो कि उनके पूरी हेल्थ पर असर डालता है और इस प्वॉइंट के चलते वे एनीमिक तक हो जाती हैं। महिलाओं को आराम की इतनी ज़्यादा ज़रूरत होती है पीरियड्स के दौरान कि बस यूं समझ लीजिए कि ये कुदरत का अपना तरीका है ऐसा करने का। अब अगर हम आज की बात करें तो वक्त भी बदला है, हालात भी, सुविधाएं भी और सोच भी, लेकिन कुछ बातें हर तरह की बहस से परे होती हैं। जैसेकि पीरियड्स के चलते महिलाओं को होने वाली ख़ून की कमी की समस्या, सुस्ती-कमज़ोरी वग़ैरह। सो कई विशेषज्ञों का ये मानना है कि इस दौरान हर तरह के व्यायाम या एक्सरसाइज़ वग़ैरह से बचा जाए और अपने आराम पर ध्यान दिया जाए। शरीर स्वाभाविक रूप से इस समय कई तरह के परिवर्तनों से गुज़र रहा होता है। सो यही अच्छा है कि बॉडी को उसका नेच्यूरल प्रॉसेस ही फॉलो करने दिया जाए। वक्त भले ही बदल गया हो, लेकिन इस बात का आज भी कोई तोड़ नहीं है कि शरीर अपने सबसे बड़ा वैद्य ख़ुद ही होता है। सो नई जानकारियां तो आपको रोज़ ही मिलती रहती हैं, एक बार इन पुराने नुस्ख़ों को भी आज़मा कर देखिए, पीरियड्स के दौरान होने वाले पेट दर्द, सुस्ती-कमज़ोरी, हल्की हरारत वग़ैरह में पड़ने वाले इसके असर से आप भी हैरानी में पड़ जाएंगी।