लाइफ पार्टनर के साथ रिश्तों में न आए दरार

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लाइफ पार्टनर के साथ रिश्तों में न आए दरार

आपके लाइफ पार्टनर में कई ऐसी कमियां हैं, जो आपको बर्दाश्त नहीं हो रही हैं तो इस लेख को ज़रूर पढ़िए।

लाइफ पार्टनर के साथ रिश्तों में न आए दरार

हाल ही में मुझे एक डायरी के कुछ हिस्से पढ़ने का मौका मिला। जानते हैं, ये डायरी के अंश किसके थे? ये थे, भारतीय सिनेमा के जाने-माने अभिनेता सईद जाफरी साहब के, जो अब हमारे बीच नहीं हैं। लगभग 86 साल की उम्र में वे इस दुनिया को अलविदा कह गए थे। 

अब उनकी डायरी का ये हिस्सा क्यों इतना वायरल हो गया था, ये बताने से पहले मैं तहे दिल से सईद जाफरी साहब की हिम्मत और ईमानदारी की तारीफ़ करना चाहूंगी, क्योंकि ग़लतियां करने वाले तो बहुत होते हैं, लेकिन ग़लतियां करके उन्हें क़ुबूल करना, उन पर अफ़सोस ज़ाहिर करना, पछताना, ऐसा करने वाले बहुत ही कम लोग होते हैं। 

सईद जाफरी साहब ने ऐसा करके न सिर्फ़ अपने दिल का बोझ थोड़ा कम करने की कोशिश, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी एक बड़ी नसीहत छोड़ी है, ख़ासकर यंगस्टर्स के लिए, जो अक्सर अपनी ढेरों एम्बीशियस के चलते अपने लाइफ पार्टनर की कमियों को इतना बढ़ा-चढ़ाकर देखते हैं कि जिसके पर्दे के पार उन्हें उनकी ख़ूबियां नज़र आनी ही बंद हो जाती हैं और अपने लाइफ पार्टनर से वे टाइमपास पार्टनर जैसा बिहेव करने लगते हैं। यही उनके लिए एक बहुत बड़ी भूल साबित होती है।

सईद जाफरी साहब अपनी इंप्रेसिव पर्सनैलिटी, बेहद शानदार ढंग से बातचीत करने के तौर-तरीकों के साथ-साथ, हिंदी, उर्दू और इंग्लिश जैसी कई भाषाओं पर अपनी पकड़ के लिए भी अलग ही पहचान रखते थे। अपनी डायरी के इस हिस्से में उन्होंने अपनी एक्स वाइफ मेहरुनिमा से जुड़ी यादें ताज़ा की हैं। 

जब सईद जाफरी साहब 19 साल के थे तो 17 साल की मेहरुनिमा से उनकी शादी हुई थी। जहां सईद साहब ने अपने रुझान के चलते बेहतरीन इंग्लिश बोलना सीखा, हाई फाई एटिकेट्स सीखे, लैविश लाइफ स्टाइल वाले मैनर्स सीखे, वह भी इतने मंझे हुए ढंग से कि वे ख़ुद किसी हाई फाई फॉरेन जैंटलमैन जैसे हो गए थे, वहीं सईद साहब की बीवी मेहरुनिमा अपने-आप को अपने घर-परिवार तक ही समेटे रखती थीं। हालांकि सईद साहब ने बहुत चाहा कि मेहरुनिमा भी उनके रंग में रंग जाए और विदेशी तौर-तरीके सीखे, लेकिन मेहरुनिमा अपने घर-परिवार का ख़याल रखकर और सिर्फ़ इसी ज़िंदगी में हर ख़ुशी ढ़ूंढ़ने वाली औरत निकलीं। लिहाज़ा सईद साहब ने कुछ समय बाद मेहरुनिमा को तलाक़ देकर एक ऐसी औरत से दूसरी शादी कर ली, जिसमें उन्हें वे तमाम ख़ूबियां नज़र आईं, जो वे मेहरुनिमा में देखना चाहते थे। 

अब यहां ये देखना दिलचस्प है कि हममें से ज़्यादातर लोग अपनी रिलेशनशिप के मामले में अक्सर वही ग़लती करते हैं, जो सईद जाफरी साहब ने भी की। मनचाहा जीवनसाथी पाने के बावजूद अचानक उन्हें महसूस हुआ कि अब उन्हें वैसा प्यार नहीं मिलता, उस तरह से कोई उनका ख़याल नहीं रखता, जैसेकि मेहरुनिमा करती थीं। 

फिर एक दिन किसी मैगज़ीन में अचानक अपनी पूर्व पत्नी का फोटो मधुर जाफरी के नाम से फूड इंडस्ट्री की एक कामयाब शख़्सियत के रूप में देखने और मामले की तह तक जाने पर सईद साहब को एहसास हुआ कि जिसे वे महज़ कांच का एक टुकड़ा समझकर तलाक़ दे चुके थे, असल में वह ख़ूबियों से भरा एक बेशकीमती हीरा हैं, जिनकी खूबियां सईद जाफरी नहीं पहचान सके थे। उसे मेहरुनिमा के दूसरे पति ने पहचाना और उनकी हौसला अफ़ज़ाई करके उनके सिर्फ़ बेस्ट लाइफ पार्टनर ही साबित नहीं हुए, बल्कि अपनी पत्नी के कामयाबी के सफ़र में भी हर कदम पर उनके साथ रहे और इसीलिए पछतावे से भरे सईद जाफरी साहब ने अपनी डायरी में ये अंश लिखे, ताकि कल जब कोई इन्हें पढ़े तो वैसी ही ग़लती दोहराने से पहले एक बार ज़रूर सोचे।

हममें से हज़ारों-लाखों लोग अक्सर अपनी ज़िंदगी में किसी को प्यार करते हैं। बहुत से लोग इतने ख़ुशकिस्मत भी होते हैं कि उन्हें अपनी मुहब्बत ही जीवनसाथी के रूप में मिल जाती है। थोड़ा वक़्त तो सब-कुछ बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि इसे हम ‘हनीमून पीरियड’ के रूप में पहचानते हैं। फिर धीरे-धीरे जब ये प्यार की शुरुआती ख़ुमारी उतरने लगती है तो ज़िंदगी और किसी भी इंसान की आदतें अपने असल रंग में सामने आने लगती हैं। 

कल तक जिसकी अदा का हर रंग लुभाता था, अब उसी में ढेरों कमियां नज़र आने लगती हैं। अपने लाइफ़ पार्टनर की अक्सर कुछ ख़ूबियों या कमियों के आधार पर ही लोग यह तय कर लेते हैं कि उनका लाइफ पार्टनर बिल्कुल घरेलू, बोर सा, लापरवाह और मामूली शख़्सियत वाला है, जबकि हम ये भूल जाते हैं कि हर इंसान ख़ूबियों से भरे एक ऐसे बीज का नाम है, जिसे अगर थोड़े से मार्गदर्शन, प्रोत्साहन, प्यार और विश्वास से भरी ज़मीन मिल जाए तो वह इतना ऊंचा उठ सकता है कि आकाश छू ले।

ख़ासतौर पर जब बात लाइफ पार्टनर की आती है तो घर में तो सभी अपने सहज-सरल अंदाज़ में होते हैं, जबकि हम जब बाहर किसी से मिलते हैं तो अपने हर बर्ताव और आदत के प्रति अतिरिक्त रूप से सतर्क होते हैं। कई बार तो मौके, जगह और दस्तूर के हिसाब से बहुत हद तक औपचारिक भी होना पड़ता है। उस समय, उस थोड़े से वक़्त के लिए किसी को भी प्रभावित करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं होती, लेकिन घर में ऐसी किसी औपचारिकता की ज़रूरत नहीं होती। बेशक वहां भी हमें कई तरह के अदब-कायदे निभाने चाहिए, घर का भी एक अनुशासन होता है, लेकिन उसकी तुलना किसी के बाहरी व्यवहार से नहीं की जा सकती। 

अब यही बात ले लीजिए कि कोई अपने ऑफिस में पावर प्वॉइंट प्रेजेंटेशन कितने प्रभावशाली ढंग से पेश करता है या कोई और प्रोफेशनल काम कितने अच्छे ढंग से करता है, इसका प्रभाव घर में कितनी हद तक पड़ सकता है, पर्सनेलिटी के हिसाब से कुछ ही हद तक न। 

ठीक उसी तरह, जैसेकि ऑफिस में इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप घर में कितना अच्छा खाना बना लेते हैं या घर को कितने व्यवस्थित ढंग से रखते हैं, अपने परिवार के लोगों को प्यार कितना करते हैं। ऑफिस में यही बात काम आती है कि एक प्रोफेशनल के रूप में आप कितनी ख़ूबियों के मालिक हैं। अब अगर कोई इन दोनों को मिक्स कर दे तो दिक्कत तो होनी ही है कि घर में आप एक ऑफिस सेक्रेट्री ढ़ूंढ़ने लगें और ऑफिस में आपको एक केयरिंग पार्टनर चाहिए। असल में ज़्यादातर लोग यही ग़लती करते हैं।

आपके साथ ये बात शेयर करने का मकसद यही है कि अगर जाने-अनजाने में आप भी ऐसी ही कोई ग़लती अपनी रिलेशनशिप में कर रहे हैं तो यही सही मौका है कि आप सचेत हो जाएं। इसके लिए हम थोड़े से टिप्स भी आपको बता रहे हैं।

अपनी इच्छाएं अपने पार्टनर पर न थोपें

दुनिया में कोई भी इंसान पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता। सभी में कुछ न कुछ कमियां ज़रूर होती हैं। हो सकता है कि जब आप अपने किसी कलिंग या किसी और बाहरी व्यक्ति से बहुत प्रभावित होकर अपने घर पहुंचते हों और अपने लाइफ पार्टनर से उसकी तुलना करते हों तो अपने लाइफ पार्टनर में आपको कुछ ज़्यादा ही कमियां नज़र आती हों, जैसे कि आपको अपने साथी का ड्रेसिंग सेंस न पसंद हो, उनकी बातचीत करने की स्टाइल अच्छी न लगती हो, उनका सेंस ऑफ ह्यूमर इरिटेट करता हो या कोई और कमी, मगर इसके चलते उन्हें हर वक्त रोकते-टोकते न रहें और इन बातों को लेकर नेगेटिव कॉमेंट तो बिल्कुल न करें, न ही उन्हें पूरी तरह से अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप बनाने की कोशिश करें। शायद ऐसा होना अच्छा भी हो, लेकिन इसका उलट भी हो सकता है। 

कहीं ऐसा न हो कि आपकी एक्सपेक्टेशन पूरी करते-करते आपका साथी इतना बदल जाए कि न तो वह आपको बदले हुए रूप में ही भाए और न ही पुराने रूप में वापस लौट पाए।  ज़िंदगी में एक जीवनसाथी के प्यार भरे स्पर्श का मुकाबला कोई और बात कर ही नहीं सकती। यही वजह है कि अक्सर जब लोग कुछ कमियों के चलते अपने रिश्तों को बदलकर आगे बढ़ जाते हैं, तब भी उन्हें भूले-बिसरे अपने पुराने रिश्ते की कोई न कोई बात याद आती रहती है, जो कि कसक बनकर उनके मन में पलती है। भले ही वे इस बात को ज़ाहिर न करते हों। 

बदलाव लाएं प्यार से

ये भी याद रखना न भूलें कि एक जीवनसाथी के तौर पर बाहरी खूबियों से ज़्यादा अहमियत भीतरी गुणों की होती है। हो सकता है कि आपका लाइफ पार्टनर बहुत ज़्यादा स्टाइलिश न हो या फिर सादगी पसंद हो, मगर इस बात पर भी ग़ौर कीजिए कि क्या जिस तरह से वह आपको प्यार करता है या फिर आपका ख़याल रखता है, क्या कोई और वैसा कर सकता है। फिर भी अगर आपको कुछ चीज़ें ज़्यादा ही खलती हों तो ये बात प्यार से अपने लाइफ पार्टनर को बता कर उन्हें निखारने-संवारने की कोशिश करें। 

इसके साथ ही साथ यह भी याद रखिए, किसी को निखारने-संवारने का मतलब उसे पूरी तरह से बदलकर उसकी अपनी स्वाभाविक छवि को बदलना नहीं होता। हो सकता है कि आपकी भी कई ऐसी बातें या आदतें हों जो दूसरे पार्टनर को न अच्छी लगती हो, लेकिन यह आपके प्रति प्यार ही हो कि आपके लाइफ पार्टनर ने उस बात को बहुत ज़्यादा अहमियत न दी हो या उसे कोई इश्यू न बनाया हो। 

ज़ाहिर है कि अगर दोनों ही पार्टनर अपने साथी की कमियों को इश्यू बनाकर देखने लगते हैं तो वहीं से तलाक़ की राहें किसी घर से अदालत तक का रास्ता बना देती हैं या फिर समझौतों के चलते घर ही नर्क समान बन जाता है।  

पहचानें अपने लाइफ़ पार्टनर की खूबियां

एक कहावत है कि घास हमेशा दूसरी तरह की ही हरी लगती है। अक्सर हमें अपने साथी की ख़ूबियों का एहसास ही नहीं होता। सो सबसे पहले तो अपने साथी को जज करना बंद करें। उसे उसकी ख़ूबियों-कमियों के आधार पर ही पहचानें, न कि अपनी पर्सनल एक्सपेक्टेशन के तराज़ू पर तौलकर। कई बार तो यहां तक होता है कि लाइफ पार्टनर में से एक की बदौलत दूसरे को इतना प्रोत्साहन मिलता है कि वह अपनी ज़िंदगी में तरक्की की एक मिसाल कायम कर देता है। 

याद रखिए, हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है, उससे कहीं ज़्यादा बड़ा सच ये है कि हर कामयाब औरत के पीछे भी किसी न किसी रूप में किसी पुरुष का हाथ होता है, क्योंकि औरतों की कामयाबी का रास्ता तो वैसे भी दुनिया में बहुत कठिन होता है। उसे कदम-कदम पर रोकने-टोकने वाले तो बहुत होते हैं, पर उसे आगे बढ़ने का मौका देने वाले बहुत कम। ऐसे में कोई उसकी छिपी हुई क्षमताओं को पहचान कर उसे सामने लाने के लिए हाथ आगे बढ़ाए, ऐसे मामले तो मिसाल बन जाते हैं। 

जलन और ईर्ष्या की जगह दें प्यार, विश्वास और सम्मान

जहां एक तरफ़ ये शिकायत सुनने को मिलती है कि लाइफ पार्टनर्स में से एक को दूसरे में कमियां बहुत दिखाई देती हैं तो एक और तस्वीर ये भी है कि अगर आपकी जीवनसाथी आप से ज़्यादा कामयाब, फेमस या टेलेंटेड है तो इसकी भी अपनी अलग समस्याएं हैं। 

अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी वाली फिल्म ‘अभिमान’ याद है न आपको। ऐसे किस्सों की तो भरमार मिल जाएगी। अगर पूरी ईमानदारी से बात करें तो हक़ीक़त ये है कि अगर पत्नियां तो अपने पति की कामयाबी का जश्न मनाती मिल जाएंगी। उन्हें अपने साथी के नाम से पहचाने जाने में भी कोई दिक्कत नहीं होती, ऐसे उदाहरणों की भी कोई कमी नहीं है, लेकिन अगर पतियों को अपनी पत्नी  के नाम से या उसकी पहचान से जोड़कर पहचाना जाना लगे तो अक्सर उनके अहम को ठेस पहुंचती है। उन्हें ये बर्दाश्त नहीं होता कि कोई उन्हें सिर्फ़ इस कारण से पहचाने कि उनकी पत्नी कितनी कामयाब महिला है। जहां इसका उलट देखने को मिलता है, उन मामलों को ही हम एक मिसाल के तौर पर देखते हैं। 

जीवनसाथी तो कहते ही उसे हैं, जो जीवन के हर सुख में, दुख में, कामयाबी में, फेलियर में, गुण में, कमी में बराबर का साथ दे। सो अगर आपको लगता है कि आपका साथी जीवन के सफ़र में कहीं पिछड़ रहा है तो उसका हौसला बढ़ाकर, उसका हाथ थामकर उसे अपने साथ ले आएं, न कि नज़रअंदाज़ कर इतने दूर निकल जाएं कि हाथ ही छूट जाए हमेशा-हमेशा के लिए। हम तो बस यही कहेंगे कि अपने लाइफ पार्टनर का साथ लाइफ लॉन्ग निभाएं। कभी उसे अपने सा बना लें तो कभी ख़ुद उसके जैसे बन जाएं।