हिंदी के दस सदाबहार उपन्यास

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हिंदी के दस सदाबहार उपन्यास

हिंदी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत है दस उपन्यासों की संक्षिप्त जानकारी

हिंदी के दस सदाबहार उपन्यास

1. गोदान

जो लोग हिंदी में किसी और लेखक या किताब का नाम न भी जानते हों, ऐसे लोग भी प्रेमचंद जी के नाम से परिचित मिल जाते हैं। उन्हीं का लिखा यह उपन्यास हिंदी प्रेमियों की सूची में हमेशा शीर्ष पर रहा है। यह प्रेमचंद जी का आख़िरी उपन्यास है। इस उपन्यास का प्रकाशन वर्ष 1936 है और इसे प्रेमचंद जी की सर्वश्रेष्ठ कृति तक भी माना जाता है। भारत को ‘गांवों का देश’ कहा जाता है और इस उपन्यास में ग्रामीण जीवन का इतना सजीव और रोचक चित्रण किया गया है कि इसके आधार पर गांवों को क़रीब से जाना जा सकता है। 

2. आधा गांव- डॉ राही मासूम रज़ा

डॉक्टर राही मासूम रज़ा का लिखा यह उपन्यास भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति का एक बहुत ही सुंदर रूप प्रस्तुत करता है। उत्तर-पूर्वी भारत की पृष्ठभूमि में लिखे गए पूरे घटनाक्रम में वहां का जन-जीवन इस तरह से सजीव हो उठता है कि यह उपन्यास काल्पनिकता की सीमाएं ही लांघ जाता है। इसे पढ़ना भारत की इस अमर संस्कृति से गुज़रना है। 

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3. मैला आंचल- फणीश्वर नाथ रेणु

किस्सागोई शैली में लिखे गए इस उपन्यास में मानव जीवन और भारतीय समाज की शायद ही कोई परत हो, जो छूट गई हो। इसमें स्वतंत्रता से पहले के भारत और स्वतंत्रता के बाद के भारत का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है। चाहे प्रेम हो या घृणा, समाज में फैली अच्छाई हो या बुराई, धर्म का पाखंड हो या मानवीय गहनता सभी को बहुत गहराई से दर्शाया गया है। 

4. मुझे चांद चाहिए- सुरेंद्र वर्मा

यह एक ऐसा उपन्यास है, जो अपने सपनों पर यकीन करना सिखाता है। एक निम्न-मध्यम वर्गीय युवती के किरदार में उस तमाम वंचित वर्ग का प्रतिबिंब मिलता है, जो रोज़ की आपाधापी भरी ज़िंदगी में सपने देखने का जोखिम उठाना ही नहीं चाहता। ऐसे में सिर्फ अपने सपनों पर विश्वास करके कोई कहां से कहां पहुंच सकता है, इसी पर आधारित है यह उपन्यास। साथ ही इसमें एक और ख़ास बात है कि इसके ज़रिये रंगमंच और फिल्मी दुनिया की वह झलक मिलती है, जो अक्सर छिपी रह जाती है। 

5. राग दरबारी- श्रीलाल शुक्ल

व्यंग्यात्मक शैली में लिखे गए इस उपन्यास का कोई मुकाबला ही नहीं है। यह भारत के दूरदराज़ के क्षेत्रों में बसे जीवन के माध्यम से पूरे भारत की समाज व्यवस्था, उसकी जटिलताओं, कुरीतियों और पाखंडों  पर ज़ोरदार प्रहार करता है। अपने कथानक और शैली के चलते इस उपन्यास को पढ़कर हंसी ज़रूर आती है, मगर फिर वह हंसी एक गहरे मौन में बदल जाती है। यदि व्यंग्य का एक सटीक और सशक्त उदाहरण देखना हो तो यह उपन्यास ज़रूर पढ़ना होगा। 

6. गुनाहों का देवता- धर्मवीर भारती

यदि प्रेम की अनकही भाषा सीखनी हो तो गुनाहों का देवता हमेशा से हिंदी प्रेमियों के अव्यक्त प्रेम की अभिव्यक्ति रहा है। इसमें दर्शाया गया प्रेम इतना पवित्र और निश्छल है कि यह हमेशा से हिंदी उपन्यासों में सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला उपन्यास रहा है। एक लंबे समय तक इसे ही प्रेम का आदर्श रूप भी माना जाता रहा है। 

7. मृगनयनी- वृंदावनलाल वर्मा

कहने को मृगनयनी एक सफलतम, लेकिन काल्पनिक उपन्यास है, लेकिन इसमें जिस तरह से एक प्रेम कथा को आधार बनाकर ऐतिहासिक स्वरूप से संजोया गया है, वह अपनी मिसाल आप है। साथ ही इसमें एक सशक्त महिला का किरदार उभरकर सामने आता है और यह बताता है कि महिला सशक्तीकरण केवल तभी संभव है, जब यह दृढ़ इच्छाशक्ति स्वयं उसके भीतर से उत्पन्न हो। तब फर्क नहीं पड़ता कि वह जंगलों में रहती है या राजमहलों में। 

8. सारा आकाश- राजेंद्र यादव

यह उपन्यास एक मध्यमवर्गीय जीवन, उसके संघर्ष और मूल्यों की कहानी है। इससे पता चलता है कि अपने अस्तित्व का संघर्ष असल में बार-बार डूबाता है तो उबारता भी है। साथ ही इसमें मध्यम वर्गीय सामाजिक जीवन का बेहद दारुण चित्रण भी देखने को मिलता है। इस उपन्यास से निराशा और आशा का अद्भुत संयोजन आधार पाता है। 

9. तमस- भीष्म साहनी

बंटवारे के दर्द और राजनीतिक विसंगतियों पर आधारित यह उपन्यास केवल पांच दिन की एक कहानी कहता है, लेकिन अपने शब्द और भाव शिल्प से यह एक ऐसा उपन्यास बन जाता है, जो उस पूरे कालखंड की अमर प्रस्तुति देता है। यह उपन्यास बीसवी सदी के भारत का एक सजग स्वरूप चित्रित करता है। इस विषय पर इस उपन्यास का कोई सानी नहीं है। 

10. आपका बंटी- मन्नू भंडारी

रिश्तों के टूटने-दरकने और फिर से जुड़ने की इस कहानी के मध्य में स्थित चरित्र के माध्यम से बाल मन की इतनी अछूती परतें उभरकर आती हैं, जिससे समझा जा सकता है कि क्यों कहा जाता है कि तलाक मात्र व्यक्तियों को ही नहीं, परिवारों को तोड़ता है। साथ ही एक संबंध में रिश्तों का दर्द और द्वंद्व भी इसमें सफलतापूर्वक चित्रित होता है।