जानिए मैरिज रजिस्ट्रेशन की अहमियत

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जानिए मैरिज रजिस्ट्रेशन की अहमियत

मैरिज रजिस्ट्रेशन की अहमियत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। आइए जानें, इसकी ख़ास बातों के बारे में।

जानिए मैरिज रजिस्ट्रेशन की अहमियत

कहते हैं कि जोड़ियां आसमान में बनती हैं, मगर निभाई धरती पर जाती हैं। जितनी ठीक ये बात है, उतनी ही ठीक ये भी है कि शादी निभाने के लिए उसे सुरक्षा-कवच पहुंचाना ज़रूरी होता है और मैरिज रजिस्ट्रेशन अपने-आप में किसी सुरक्षा-कवच से कम नहीं है। इतना ही नहीं, जब आप इसकी अहमियत और इससे जुड़ी सुविधाओं के बारे में जानेंगे तो ख़ुद ही समझ जाएंगे कि क्यों है ज़रूरी हर शादी को रजिस्टर्ड कराना। तो आइए जानते हैं इसी से जुड़ी कुछ अहम बातों के बारे में।

मैरिज रजिस्ट्रेशन होता क्या है

जैसाकि हम जानते ही हैं कि पहले भारतीय समाज में सभी धर्मों में अपने-अपने रीति-रिवाज के अनुसार की गई शादी को ही सामाजिक और कानूनी मान्यता प्राप्त थी। यहां तक कि प्रेम विवाह के अंतर्गत मंदिर में की गई मालाओं की अदला-बदली को भी शादी के तौर पर स्वीकार कर लिया जाता था, मगर साल 2006 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सभी शादियों का पंजीकरण, यानी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद से विवाह पंजीयन अधिनियम, 2008 के अंतर्गत सभी शादियों को रजिस्टर्ड करवाना अनिवार्य हो चुका है। अब भारत में हुई शादियों को हिंदू विवाह अधिनियम,1955 या फिर विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अंतर्गत रजिस्टर्ड करवाया जा सकता है। जैसाकि इसमें नाम से ही ज़ाहिर है कि हिंदू विवाह अधिनियम केवल हिंदू धर्म के विश्वासियों पर ही लागू होता है, जबकि विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत भारत के सभी नागरिकों को समान लाभ मिलता है।

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 बहुत फ़ायदे हैं मैरिज रजिस्ट्रेशन के

बेशक शादी एक विश्वास पर आधारित रिश्ते का नाम है, लेकिन अगर उसे सुरक्षा देने के नाम पर उठाए गए कदम के साथ कई सुविधाएं भी जुड़ जाएं तो उसे सोने पर सुहागा कहते हैं। अब यही लीजिए कि शादी के बाद अगर कोई महिला अपना नाम या सरनेम नहीं बदलना चाहती तो मैरिज रजिस्ट्रेशन की सहायता से वह कई लाभों से वंचित रहने से सुरक्षित हो जाएगी, जैसेकि- ज्वॉइंट बैंक अकाउंट खुलवाना, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से संबंधित लाभ लेना, नेशनलाइज़, यानी राष्ट्रीयकृत बैंक के लाभ लेना, पासपोर्ट बनवाना, वीज़ा प्राप्त करना, गुज़ारा भत्ता, पेंशन आदि प्राप्त करना, पति की संपत्ति में अधिकार पाना जैसे कई सरकारी अथवा ग़ैर सरकारी कार्य आदि। इसके अलावा अगर महिलाओं के हितों की सुरक्षा के नज़रिये से भी देखें तो मैरिज रजिस्ट्रेशन के कई लाभ हैं। रजिस्टर्ड की हुई शादी को झुठलाना या गैर मान्य करार देना आसान नहीं है, जैसाकि पहले मंदिर में माला अदला-बदली करके की गई शादियों में हो जाता था। सामान्य रीति-रिवाज के अनुसार की गई शादियों में भी कई बार ऐसा होता था कि किसी कानूनी अथवा अन्य विवाद के समय गवाहों या प्रत्यक्षदर्शियों के मुकर जाने से भी शादी को साबित करना एक कठिन कार्य हो जाता था। मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ऐसी सभी समस्याओं का एकमात्र सहज समाधान है।

 मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी दस्तावेज

शादी को रजिस्टर्ड करवाने के लिए कुछ ज़रूरी दस्तावेज़, यानी डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत पड़ती है, जिनमें शामिल हैं- वर तथा वधू के अलग-अलग पासपोर्ट साइज़ फोटो, वर-वधू की शादी की फोटो, शादी का निमंत्रण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, वर-वधू के पहचान पत्र, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड, दोनों के ही जन्मतिथि प्रमाण पत्र, एफिडेविट के साथ वर तथा वधू के शपथ पत्र, दो गवाहों के पहचान पत्र तथा निवास प्रमाण पत्र व आधार कार्ड।

यहां इस बात का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि मैरिज रजिस्ट्रेशन फॉर्म में आप जो भी जानकारी दर्ज कर रहे हैं, वह एक सही होनी चाहिए। साथ ही फॉर्म का पूरा भरा होना भी ज़रूरी है। आप कोई भी कॉलम ख़ाली नहीं छोड़ सकते।

मैरिज रजिस्ट्रेशन को आप अपनी सुविधा से ऑनलाइन भी करवा सकते हैं।